जो इन्सानों पर गुज़रती है ज़िन्दगी के इन्तिख़ाबों में / पढ़ पाने की कोशिश जो नहीं लिक्खा चँद किताबों में / दर्ज़ हुआ करें अल्फ़ाज़ इन पन्नों पर खौफ़नाक सही / इन शातिर फ़रेब के रवायतों का बोलबाला सही / आओ, चले चलो जहाँ तक रोशनी मालूम होती है / आओ, चले चलो जहाँ तक....आइये साथ चलें.
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